जहन्नुम की अप्सरा 19
अभी चार बजे थे कि इमरान की आँख खुल गई। कोई फ़्लैट का दरवाज़ा पीट रहा था। इमरान की ललकार पर जो आवाज़ आयी वह कैप्टन फ़ैयाज़ के अलावा और किसी की नहीं हो सकती थी।
इमरान ने उठ कर दरवाज़ा खोला।
‘‘किस मुसीबत में फँसा दिया तुमने!’’ फ़ैयाज़ ने झल्लायी हुई आवाज़ में कहा।
‘‘क्यों! क्या हुआ....?’’
‘‘वह आदमी जिसका नाम तुमने इरशाद बताया था....वह तो पागल है। पिछले साल पागलख़ाने में भी रह चुका है। कई पुलिस अफ़सरों ने उसकी तस्दीक़ की है वह अब भी पागल है और दिन-रात सड़कों पर मारा-मारा फिरता है!’’
‘‘अच्छा दूसरा ज़ख़्मी आदमी!’’ इमरान ने पूछा।
‘‘वह तो वापसी पर रास्ते में ही दम तोड़ गया। मोरीना कहती है कि इरशाद ने ख़ुद को एशियाई डांसों का माहिर बता कर उसकी पार्टी को इस इमारत में बुलाया था और वादा किया था कि वह उसे ऐशिया के कुछ पुराने डांसों के बारे में बतायेगा। उसका बयान है कि जब वह कमरे में पहुँची तो उसे और उसके साथियों को एक बेहोश ज़ख़्मी आदमी कुर्सी में बँधा हुआ दिखाई दिया। फिर इरशाद ने उन सब से कहा कि अगर उन्होंने उसकी म़र्जी के ख़िलाफ़ किया तो उनका भी उसी आदमी का-सा हश्र होगा। उसने उन्हें धमकाने के लिए दो रिवॉल्वर निकाल लिये थे। फिर मोरीना से दूसरे कमरे में अकेला चलने के लिए कहा। उस पर उसके साथियों को ग़ुस्सा आ गया। हंगामा हुआ और उसके दो साथी इरशाद की गोलियों का निशाना बन गये और पुलिस पर भी उसी ने गोली चलायी थी।’’
‘‘और तुम इतने में ही बोर हो गये।’’ इमरान अँगड़ाई ले कर भर्रायी हुई आवाज़ में बोला।
‘‘क्या तुम्हारे पास उनके ख़िलाफ़ कोई ठोस सबूत है?’’
‘‘हाँ, मोरीना एक ऐसे मुल्क की जासूस है जो सारी दुनिया पर अपनी हुकूमत चाहता है।
‘‘साबित कर सकोगे....?’’
‘‘क्यों नहीं....! ग़ज़ाली दक्षिण अफ्रीका की सीक्रेट सर्विस का आदमी था।’’ इमरान ने कहा और मेज़ की दराज़ से ट्रेसिंग क्लाथ का वह टुकड़ा निकाल कर फ़ैयाज़ के सामने डाल दिया जो ग़ज़ाली के कोट के अन्दर से निकला था। फ़ैयाज़ उसे देखने लगा।
इस अँगूठी का मतलब यही था कि ज़रूरत पड़ने पर कोट उधेड़ा जा सके। देखो इस तहरीर के नीचे उस डिपार्टमेंट की सरकारी मुहर भी मौजूद है जिससे ग़ज़ाली का ताल्लुक़ था और वहाँ की हुकूमत से इसकी तस्दीक़ आसानी से कर सकते हो। ख़ुद ग़ज़ाली को इस बात का डर था कि मोरीना का पीछा करने के सिलसिले में वह अपनी ज़िन्दगी भी खो सकता है। इसलिए उसने ये तहरीर अपने कोट में इस तरह छुपा रखी थी और उसके मरने के बाद वह अँगूठी ही इस तहरीर तक दूसरों को पहुँचा सकती थी। पूरी तहरीर पढ़ो। ख़ुद ही साफ़ हो जायेगा। ग़ज़ाली काफ़ी दिनों से उसके पीछे पड़ा रहा है। वह इस बात पर भी शक करता है कि मोरीना इतालवी है। वह लिखता है कि चाहे मेरी ज़िन्दगी ही क्यों न ख़त्म हो जाये, मैं मोरीना के ख़िलाफ़ ठोस क़िस्म के सबूत इकट्ठा किये बग़ैर चैन से नहीं बैठूँगा। वह एक ऐसे मुल्क की जासूस है जो एक ख़ास क़िस्म के इंक़लाब के ज़रिये सारी दुनिया पर अपनी हुकूमत के ख़्वाब देख रहा है। मोरीना सारी दुनिया में अपने फ़न का मुज़ाहिरा करती फिरती है। हालाँकि उसका असल मक़सद यह है कि वह सारी दुनिया में अपने एजेंट बनाती फिरे। इससे मालूम होता है कि ग़ज़ाली ने भी मोरीना के साथ कई मुल्कों की सैर की है और प्यारे फ़ैयाज़....और क्या-क्या बताऊँ। मैं तो इस केस में सिर्फ़ मक्खियाँ मारता रहा हूँ। यह दरअसल ग़ज़ाली और इरशाद का केस है। उस शहीद का केस है जिसके जिस्म से उसकी ज़िन्दगी ही में काफ़ी ख़ून निकाल लिया गया था।
इमरान ने इरशाद और उसके साथी की बात दोहराते हुए पूछा। ‘‘इरशाद कहाँ है?’’
‘‘हवालात में! हालाँकि वह चीख़ रहा था कि वह पागल नहीं है। वह बहुत अहम राज़ों का खुलासा करेगा। मगर एस.पी. ने उसे हवालात में डलवा दिया। मोरीना इस वक़्त भी एस.पी. के दफ़्तर में मौज़ूद है।’’
‘‘इरशाद बहुत कुछ बतायेगा। वह इस क़ाबिल है कि उसकी पूजा की जाये। फ़ैयाज़, वह उनसे बेहतर है जो ख़ुद को मुल्क और क़ौम का मोहब्बती कहने के बावजूद भी उनके लिए कुछ नहीं कर सकते।’’
‘‘और कोई सबूत! इमरान....जल्दी करो प्यारे वक़्त कम है। एस.पी. मुझ पर ठहाका लगा रहा होगा।’’
‘‘और वह टुकड़े!’’ इमरान कुछ सोचता हुआ बोला। ‘‘जो माथे पर चुभे हुए थे, उनके फेंकने का तरीक़ा एक दिलचस्प ईजाद है।’’
इमरान दीवार की तरफ़ बढ़ा जहाँ उसका कोट टँगा हुआ था। फिर जेब से वह काले रंग का चपटा-सा डिब्बा निकाल कर फ़ैयाज़ की तरफ़ बढ़ाता हुआ बोला। ‘‘यह एक छोटी-सी प्रेशर मशीन है। इधर आओ तुम्हें दिखाऊँ।’’
इमरान ने डिब्बे को मेज़ पर रख कर उसे खोल डाला। ‘‘ये देखो इस बटन को दबाने से एक छोटा-सा ट्रिगर बाहर निकल आता है और यह देखो ये छोटी-छोटी बैटरियाँ....ट्रिगर दबाते ही ये बैटरियाँ मशीन से कनेक्ट हो जाती हैं। मशीन चल पड़ती है....और इस सूराख़ से टुकड़ों की बौछार निकलने लगती है। यह देखो, इसमें ये ज़हरीले टुकड़े काफ़ी तादाद में मौजूद है।’’
‘‘बहुत अच्छा।’’ फ़ैयाज़ इमरान की पीठ ठोंकता हुआ बोला। ‘‘अब हमने मैदान मार लिया।’’
‘‘इसे ले जाओ।’’ इमरान ने कहा। ‘‘लेकिन एहतियात से रखना....वरना तुम्हारी बीवी तलाक़ लेने से पहले ही आज़ाद हो जायेगी और मेरी फ़र्म का बेकार ही में नुक़सान होगा।’’
‘‘मगर इमरान! तुम ग़ज़ाली को कैसे जान गये थे?’’ फ़ैयाज़ ने पूछा।
‘‘सिर्फ़ इत्तफ़ाक़! वह ख़ुद ही मुझे मोरीना का आदमी समझ कर मुझसे भिड़ गया था और उसने मोरीना सलानियो का हवाला भी दिया था। फिर उसे अपनी ग़लतफ़हमी का एहसास हुआ, लेकिन भला मैं कब उसे छोड़ने वाला था। मैंने उसका पीछा करके उसके रहने-सहने का पता लगा लिया। इस तरह दूसरी सुबह मैं उसकी लाश पहचानने में कामयाब हुआ।’’
इमरान ने लेडी तनवीर वाले वाक़ये का बयान नहीं किया।
‘‘और आर्टामोनॉफ़!’’ फ़ैयाज़ ने पूछा।
‘‘आर्टामोनॉफ़....हाँ ....वह सिगरेट की एक ख़ाली डिबिया की वजह से पकड़ा गया?
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इमरान ने दूसरा वाक़या भी दोहराया....और कुछ देर खामोश रहने के बाद बोला। ‘‘अगर वह इस बीमारी का शिकार न होता तो इमरान ज़िन्दगी भर सिर पटकता रह जाता, क्योंकि वह मोरीना सलानियो का नाम भी भूल गया था। यह एक बहुत ख़राब आदत है। बेकार में अपने दस्तख़त बनाना। मैंने अक्सर तुम्हें भी इस तरह हरकत करते हुए देखा है। तुम अक्सर अपने नाख़ूनों और हथेली पर अपने दस्तख़त बनाया करते हो।’’
इमरान कुछ देर ख़ामोश रह कर फिर बोला। ‘‘उधर ग़ज़ाली ने अपने नोट में मोरीना की नैशनैलिटी के बारे में शक ज़ाहिर किया है। वह लिखता है कि उसका नाम इतालवियों जैसा है, लेकिन वह हक़ीक़त में इतालवी नहीं मालूम होती। इसलिए मैंने इसका तजरुबा किया और मुझ पर हक़ीक़त खुल गयी। वह इतालवी नहीं जर्मन है।’’
इमरान ने चमगादड़ फेंकने वाली हरकत बयान की और कैप्टन फ़ैयाज़ बेतहाशा हँसने लगा। वह इस वक़्त ज़रूरत से ज़्यादा ख़ुश दिख रहा था।
‘‘लेकिन इमरान!’’ उसने थोड़ी देर बाद कहा। ‘‘रिपोर्ट फिर भी अधूरी रहेगी। आख़िर मैं इसके बारे में क्या लिखूँगा कि मुझे ग़ज़ाली के कमरे का पता कैसे मालूम हुआ था?’’
‘‘ओ हाँ!’’ इमरान कुछ सोचने लगा, फिर बोला। ‘‘इरशाद ही की वजह से ये प्रॉब्लम हल हो जायेगी। तुम शुरू ही में उसे अपनी रिपोर्ट में जगह दो। इस तरह कि उसने तुम्हारे पास आ कर मोरीना की असल शख़्सियत पर रोशनी डाली और इसका भी इक़रार किया कि वह ख़ुद भी उसी पार्टी का एक मेम्बर है। लेकिन तुम्हें उसके बयान पर यक़ीन नहीं आया....इस पर उसने ग़ज़ाली का हवाला दे कर उसका पता बताया और यह भी कहा कि वह दक्षिण अफ्रीका की सीक्रेट सर्विस का आदमी है और मोरीना का पीछा कर रहा है....जिस रात को यह बातचीत हुई, उसी की सुबह को ग़ज़ाली की लाश पायी गयी....और उसके कोट से बरामद होने वाली अँगूठी ने तुम्हें उसके कोट को उधेड़ डालने पर मजबूर कर दिया। इस तरह तुम्हें ग़ज़ाली का लिखा नोट मिला। फिर तुम इरशाद के बताये हुए पते पर ग़ज़ाली के घर की तलाश में रवाना हो गये वहाँ तुम्हें सफ़ाई दिखी। लेकिन वह सिगरेटों का ख़ाली पैकेट जिस पर आर्टामोनॉफ़ के दस्तख़त थे। हाँ, शायद समझ गये होगे....फिर तुम उस सिगरेट के पैकेट से मोरीना सलानियो तक पहुँच गये....! इरशाद फिर कल शाम को तुम्हारे पास आया और इत्तला दी कि आज रात को सुरैया लॉज पर छापा मारा जाये तो मुजरिम ऐन मौक़े पर गिरफ़्तार किये जा सकते हैं, क्योंकि वह स्थानीय पार्टी के एक शख़्स को उसकी एक ग़लती की बिना पर सज़ा देंगे....इसलिए तुमने छापा मारा और कामयाब हो गये....! बस अब तुम जा कर इरशाद को पक्का कर लो और हाँ, इरशाद से यह भी कहलवा देना कि उसे ग़ज़ाली की शख़्सियत की जानकारी मोरीना ही से हुई थी। मोरीना ने उससे कहा था कि वह ग़ज़ाली से होशियार रहे।’’
‘‘जियो! इमरान जियो!’’ फ़ैयाज़ एक बार फिर उसकी पीठ ठोंकने लगा। ‘‘बोलो....क्या माँगते हो....जो कुछ कहोगे मिल जायेगा....बोलो क्या माँगते हो!’’
‘‘दस ऐसी मालदार औरतें जो अपने शौहरों से तलाक़ चाहती हों।’’ इमरान ने संजीदगी से कहा और फ़ैयाज़ हँसने लगा।
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